Saturday, September 21, 2013

उम्मीद की खिड़की !

 कुछ ख्वाब अब तक छू नहीं पाया हूँ,
पर उम्मीद की खिड़की आज भी खुली है,

कुछ रंग आज भी कच्चे से लगते हैं, 
पर उम्मीद की रंगत हवाओं में घुली है, 

ऐसा नहीं कि कुछ नज़र नहीं आ रहा, 
तस्वीर तो है बस धुँधली है, 

हम अपने दिल को तो कब का समझा लेते, 
पर जिस महफिल में हैं वही मनचली है, 

कुछ ख्वाब अब तक छू नहीं पाया हूँ, 
पर उम्मीद की खिड़की आज भी खुली है

- अजय बामल